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सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Hindi Text)

यह संहिता नौ मौजूदा सामाजिक सुरक्षा अधिनियमों को एक ढांचे में मिला देती है, जिससे संगठित, असंगठित, अस्‍थायी और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

2025-12-01 01:27:24 | Admin

  • पहली बार अस्‍थायी और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों को मान्यता दी गई और उनके कल्याण के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोष की स्थापना की गई।
  • महिला-केंद्रित प्रावधानों को मजबूत करता है, जिसमें 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश, वर्क-फ्रॉम-होम विकल्प, और क्रेच सुविधाएँ शामिल हैं।
  • डिजिटल रिकॉर्ड, छोटे उल्‍लंघनों को अपराध मानने की बजाय उन्‍हें सुलझाने और निपटाने, तथा पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित निरीक्षक-सह-सुविधादाता प्रणाली के माध्यम से व्यवसाय करने की आसानी को बढ़ावा देता है।
  • राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की स्थापना, जो असंगठित, अस्‍थायी और प्लेटफ़ॉर्म क्षेत्रों के विभिन्न श्रमिक वर्गों के लिए उपयुक्त योजनाएं बनाने और इनकी निगरानी के लिए सरकार को सलाह देगा।
  • राज्य असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का प्रावधान, असंगठित, अस्‍थायी और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों के लिए उपयुक्त योजनाओं के संबंध में राज्य सरकारों को सलाह देगा।
  • एक सामाजिक सुरक्षा कोष का निर्माण, जो केंद्रीय और राज्य सरकारों के योगदान, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) से एकत्र राशि, जुर्माने से एकत्र राशि आदि से भरा जाएगा। इस कोष का उपयोग इन श्रमिकों के लिए जीवन बीमा, विकलांगता कवर, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, और भविष्य निधि योजनाओं जैसे लाभ प्रदान करने के लिए किया जाएगा।

परिचय
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 भारत के श्रम कल्याण ढांचे में एक महत्वपूर्ण सुधार का प्रतिनिधित्व करती है, जिसका उद्देश्य कार्यबल के सभी वर्गों के लिए व्यापक और समावेशी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह संगठित, असंगठित, अस्‍थायी और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिक, सभी को समान कवरेज प्रदान करता है।
कर्मचारी-अनुकूल प्रावधान
1. नियत अवधि के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी
सरकार ने नियत अवधि के कर्मचारियों (एफटीई) के लिए ग्रेच्युटी की पात्रता अवधि को पांच वर्ष से घटाकर एक वर्ष कर दिया है। ऐसे मामलों में जहां कर्मचारी लगातार एक वर्ष सेवा पूरी करता है, तो  आनुपातिक आधार पर ग्रेच्युटी लागू होगी।
2. अस्‍थायी और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों का समावेशन
देश में पहली बार सामाजिक सुरक्षा लाभ असंगठित, अस्‍थायी और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों तक विस्‍तृत किए गए हैं। 
3. ईपीएफओ के तहत सार्वभौमिक कवरेज
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का कवरेज बढ़ाती है, जिसके तहत ये प्रावधान उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होंगे, जिनमें 20 या उससे अधिक कर्मचारी हों, चाहे उद्योग का प्रकार कोई भी हो।
भविष्य निधि प्रणाली के तहत अब अधिक कार्यस्थल और अधिक कर्मचारी शामिल होंगे, जिससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति बचत जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे। अब चूंकि, लागू होने का मुद्दा हल हो गया है, यह मुकदमों को भी कम करेगा।
4. राष्ट्रीय पंजीकरण और विशिष्ट पहचान
सरकार विशिष्ट श्रमिक समूहों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों को डिजाइन और प्रदान करना आसान बनाने के लिए असंगठित श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करेगी। सभी असंगठित, अस्‍थायी और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को राष्ट्रीय पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत करना होगा, जिसके बाद प्रत्येक श्रमिक को एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) प्राप्त होगी। यह आधार द्वारा सत्यापित होगी और पूरे देश में मान्य होगी।
5. “वेतन” की समान परिभाषा
सामाजिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सभी श्रम कानूनों में “वेतन” की एक मानकीकृत परिभाषा का पालन किया जाएगा। संहिता के अनुसार, “वेतन” में मूल वेतन, महंगाई भत्ता, और रिटेनिंग अलाउंस (कार्यस्‍थल पर बने रहने के लिए दिया जाने वाला भत्‍ता), यदि कोई हो, शामिल हैं।
यदि अन्य भुगतान जैसे बोनस, किराया भत्ता, आवागमन भत्ता, ओवरटाइम भत्ता, या कमीशन कुल पारिश्रमिक का 50% (या सरकार द्वारा अधिसूचित प्रतिशत) से अधिक हो, तो अतिरिक्‍त राशि को वेतन में जोड़ दिया जाएगा।
इससे वेतन राशि बढ़ेगी और इसके परिणामस्वरूप ग्रेच्युटी, पेंशन और अवकाश वेतन जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों का मूल्य बढ़ जाएगा, जो वेतन से जुड़े होते हैं।
6. “परिवार” की विस्‍तृत परिभाषा
संहिता “परिवार” की परिभाषा का विस्तार करती है, जिसमें महिला कर्मचारी की सास और ससुर (आय सीमा के अधीन) भी शामिल हैं। इसमें एक अल्पवयस्क अविवाहित भाई या बहन भी शामिल है, जो माता-पिता जीवित न रहने पर, पूरी तरह से बीमित व्यक्ति पर निर्भर हो। इस विस्तार से परिवार के उन सदस्यों का कवरेज बढ़ जाएगा जो ईएसआईसी लाभों के पात्र हैं।
7. कर्मचारी मुआवजे के तहत काम पर आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को शामिल किया गया
पहले, कर्मचारी के काम पर आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को कार्य-सम्बंधित नहीं माना जाता था, और कर्मचारी या उनके परिवार को मुआवज़ा पाने का अधिकार नहीं था।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 ने इसे बदल दिया है। अब, कोई भी दुर्घटना जो काम पर आने-जाने के दौरान होती है, उसे “रोजगार के दौरान हुई  दुर्घटना” माना जाएगा।
इस तरह की स्थितियों में प्रभावित कर्मचारी या उनके परिवार मुआवजा या ईएसआईसी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
8. ईएसआईसी कवरेज का विस्तार
पहले, ईएसआईसी  कवरेज केवल कुछ अधिसूचित क्षेत्रों तक ही सीमित थी। संहिता के तहत, इस प्रतिबंध को हटाकर अब ईएसआईसी   कवरेज पूरे भारत में विस्‍तृत कर दी गई है।
इसके अलावा, यदि नियोक्ता और कर्मचारी दोनों शामिल होने के लिए सहमत हों, तो 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए स्वैच्छिक ईएसआईसी सदस्यता की भी अनुमति है।
जोखिमपूर्ण या जानलेवा व्यवसायों के लिए 10 कर्मचारियों की न्यूनतम सीमा हटा दी गई है। ऐसे कार्य में लगे एकल कर्मचारी के लिए भी ईएसआईसी कवरेज अनिवार्य है। यदि नियोक्ता चाहे, तो ईएसआईसी लाभ प्लांटेशन श्रमिकों तक भी बढ़ाया जा सकता है।

महिला-अनुकूल प्रावधान
1. मातृत्व लाभ की पात्रता
हर महिला कर्मचारी जो अनुमानित प्रसव से पहले 12 महीनों में अन्‍दर कम से कम 80 दिन काम कर चुकी हो, वह अवकाश अवधि के दौरान अपने औसत दैनिक वेतन के बराबर मातृत्व लाभ की पात्र होगी।
मातृत्व अवकाश की अधिकतम अवधि 26 सप्ताह है, जिसमें से अधिकतम 8 सप्ताह का अवकाश प्रसव से पहले लिया जा सकता है।
जो महिला 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती है या एक कमिशनिंग माता (सरोगेसी का उपयोग करने वाली जैविक माता) है, उसे गोद लेने की तारीख से या बच्‍चा उसके सुपुर्द किए जाने की तारीख से 12 सप्ताह का मातृत्व लाभ प्राप्त होगा।
2. वर्क फ्रॉम होम
मातृत्व अवकाश के बाद लौट रही महिलाओं को अधिक लचीलापन प्रदान करने के लिए, संहिता उन्हें घर से काम करने की अनुमति देती है, यदि कार्य का स्वरूप उन्‍हें इसके लिए अनुमति देता है।
नियोक्ता और कर्मचारी के बीच पारस्परिक सहमति के आधार पर नियोक्ता घर से काम करने की अनुमति दे सकता है।
3. प्रसव आदि का प्रमाण देने के लिए सरलीकृत प्रमाण-पत्र
गर्भावस्था, प्रसव, गर्भपात, या संबंधित बीमारी जैसी मातृत्व-संबंधी स्थितियों का प्रमाण संहिता के तहत सरल बना  दिया गया है। अब मेडिकल प्रमाणपत्र निम्नलिखित द्वारा जारी किए जा सकते हैं:

  • पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिश्‍नर
  • मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा कार्यकर्ता)
  • योग्यता-प्राप्‍त सहायक नर्स
  • दाई

4. चिकित्सा बोनस
यदि नियोक्ता मुफ्त प्रसवपूर्व और प्रसवोपरांत देखभाल उपलब्‍ध नहीं कराता है, तो महिला कर्मचारी ₹3,500 के चिकित्सा बोनस की पात्र होगी।
5. स्तनपान अवकाश
प्रसव के बाद काम पर लौटने पर, महिला कर्मचारी को अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए प्रतिदिन दो स्तनपान अवकाश पाने का अधिकार है, जब तक बच्चा 15 महीने का नहीं हो जाता।
6. क्रेच सुविधा
50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान को निर्धारित दूरी के भीतर क्रेच सुविधा प्रदान करनी होगी। यह प्रावधान अब लिंग-तटस्थ है और सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों पर लागू होता है।

Potential UPSC/State PCSs Questions:
Question 1:
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रमुख उद्देश्यों और दायरे की व्याख्या कीजिए। इस संहिता द्वारा संगठित, असंगठित, अस्थायी और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज में लाए गए परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।​
Question 2:
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में मातृत्व लाभ, वर्क‑फ्रॉम‑होम, क्रेच सुविधा और स्तनपान अवकाश जैसे प्रावधानों के माध्यम से कार्यस्थल पर जेंडर न्याय को सुदृढ़ करने के प्रयासों का विश्लेषण कीजिए। क्या ये प्रावधान पर्याप्त हैं? तर्क दीजिए।​
Question 3:
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को अन्य तीन श्रम संहिताओं (वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, और व्यावसायिक सुरक्षा एवं कार्य स्थितियाँ संहिता) के साथ जोड़कर देखते हुए, भारत में श्रम‑सुधारों की समग्र दिशा और उसके श्रमिक सशक्तीकरण पर प्रभाव की चर्चा कीजिए।​
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